Tuesday, 20 February 2018

Collection of Amrit Kan by Brahmachari Shri Girish Chandra Varma Ji

Amrit Kan Collection by Brahmachari Shri Girish Chandra Varma Ji

शारदीय नवरात्री के परम पावन पर्व से परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के उपदेशामृत प्रवाह से चुनकर मानव कल्याण के लिए ब्रह्मचारी गिरीश जी द्वारा प्रस्तुत कुछ अमृत कण का संग्रह :- 


Amrit Kan 1
"जीवन आनंद है, संघर्ष नहीं। मनुष्य जैसा चाहे अपना जीवन वैसा बन सकता है, आनंदमय या दुखी।" - Brahmachari Girish Ji, Amrit Kan 01 October 2016


Amrit Kan 2
"मनुष्य का जन्मसिद्ध मनवाधिकार है सुखी, समृद्ध, शिक्षित, स्वस्थ, प्रबुद्ध और भूतल पर स्वर्ग जैसा दिव्या जीवन जीना।" - By Brahmachari Girish Ji. Amrit Kan 2nd October 2016.

Amrit Kan 3
आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों तत्वों से सन्तुलित जीवन ही सर्वश्रेष्ठ जीवन हो सकता है। Brahmachari Girish Ji, Amrit Kan 3 Oct 2016.

Amrit Kan 4
"वृक्ष को हरा भरा रखने, पल्लवित, पुष्पित, फलित होने के लिए वृक्ष की मूल में जल डालते हैं न कि डाली और पत्तों पर।" - Brahmachari Girish Ji. Amrit Kan 4 October 2016. 


Amrit Kan 5
भक्ति में शक्ति है यह पूर्णतः सत्य है। श्रद्धा और विश्वाश फलदायक हैं। अविश्वाश और शंका अस्थिरता का कारण हैं। - Brahmachari Girish Ji . अमृत कण 5 October 2016

Amrit Kan 6
"क्रिया सिद्धि सत्वे भवति महताम् नोपकरणे" महान व्यक्तियों के कार्य सत्व से सिद्ध होते हैं केवल उपकरणों से नहीं।" Brahmachari Girish Ji अमृत कण 6 October 2016  

Amrit Kan 7
अमृत कण 7 October 2016. 'स्त्वमेव जयते' ही सफल जीवन का मंत्र है। कहीं भी अस्त्वमेव जयते नहीं कहा है। -Brahmachari Girish Ji " Amrit Kan 07 October 2016

Amrit Kan 8
अमृत कण 8 October 16. योग मुक्ति कारक है। मोक्ष की प्राप्ति मानव जीवन का परम लक्ष्य है और यह योग का नित्य अभ्यास प्रदान कर सकता है। Brahmachari Girish Ji, Amrit Kan 08 October 2016

Amrit Kan 9
योग का अर्थ केवल योगासन या प्राणायाम नहीं है, अष्टांग योग का अभ्यास पूर्ण फलदायी है। - Brahmachari Girish Ji . अमृत कण 9 October 16

Amrit Kan 10
मन का व्यक्त रूप मस्तिष्क और मस्तिष्क की क्रियात्मकता बुद्धि है। एक समन्वय करने वाली योग विद्या है।अमृत कण 10 October 16. 

Amrit Kan 11
मन की शाँत अवस्था - शुक्ष्म अवस्था - अव्यक्त चेतना और उसकी शुक्ष्मतर अवस्था आत्मा और उसके व्यक्त रूप शरीर के बीच की समन्वयकारी क्रिया योग है। - Brahmachari Girish Ji अमृत कण 11 October 16.

Amrit Kan 12
"शाँत प्रशान्त स्थिर शुद्ध अद्वैत आत्मा और उसके चेतन रूप-चेतना के बीच समन्वयकारी योग ही है। - Brahmachari Girish Ji अमृत कण 12 October 16. 



Amrit Kan 13

                              "व्यक्त और अव्यक्त के मध्य की अहम कड़ी योग है।" - Brahmachari Girish Ji "          अमृत कण 14October 16. 
Amrit Kan 14

                              अमृत कण 14 Oct 2016. "आत्मा को परमात्मा से मिला देने वाला योग ही है। योगाभ्यास व्यक्ति की सीमित विचारधारा को समष्टि की अनन्त विस्तारित विचारधारा से मिला देता है।" -Brahmachari Girish Ji

Amrit Kan 15
         योग मनुष्य की चेतना में व्याप्त दुर्बलता को समाप्त करके जीवन में नई शक्ति, ऊर्जा, प्रकाश और विश्वाश उत्पन्न करता है। - Brahmachari Girish Ji   अमृत कण 15 Oct 2016. 

Amrit Kan 16
         “अहम् ब्रह्मास्मि”, “अयमात्मा ब्रह्म”। योग विद्या द्वारा ही जीव को ब्रह्म होने का ज्ञान प्राप्त होता है। -Brahmachari Girish Ji अमृत कण 16 Oct 2016. 

Amrit Kan 17
                              अमृत कण - "आत्मानुभूति, आत्मसाक्षात्कार, आत्मत्व को समझने और समझाने के लिये जिस माध्यम की आवश्यकता होती है, वह योग ही है।" - Brahmachari Girish Ji. 17 Oct 2016.

Amrit Kan 18
                              "मन की - आत्मा की शुद्धि, उसके विकास, उसकी मानसिक शक्ति में विकास योग द्वारा ही होता है।" - Brahmachari Girish Ji, अमृत कण, 18 October 2016. 

Amrit Kan 19
                              आत्मा के प्रकट रूप भौतिक शरीर की शुद्धि, उसका विकास, ओज-तेज में वृद्धि योग के द्वारा ही होती है। - Brahmachari Girish Ji. अमृत कण 19 October 2016.

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